ब्लॉग : शहाबुद्दीन जिसे मीडिया ने नहीं दिखाया

ब्लॉग : शहाबुद्दीन जिसे मीडिया ने नहीं दिखाया

सिवान : जो सिवान शहर से है उससे शहाबुद्दीन का नाम दसकों से जुड़ा है और हमेशा जुड़ा रहेगा।
जब बात शहाबुद्दीन की होती है तो याद ‘कॉम्रेड चंद्रशेखर’ आते हैं जिनको शहर के जे.पी. चौक पर गोलियों से छल्ली किया गया था।
आरोप उनपे आया लेकिन जाँच में कुछ नहीं निकला.
शहाबुद्दीन का नाम जब भी कोई नेता खुले मंच पे लेता है तो उसके सियासी फायदे होते हैं।

अमित शाह जब बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे तब उन्होंने ये कहा था की भाजपा के हारने पर जेल में बैठे शहाबुद्दीन ख़ुश होंगे और पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे।
इस दिए गए भाषण को भी बिहार में भाजपा के हार के लिए दोषी समझा गया।

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डॉ. राजीव जायसवाल शहाबुद्दीन के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए लिखते हैं कि ” उनके विकास कार्यों को सिवान की जनता कभी भूल नहीं सकती”।

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डॉ. राजीव जायसवाल शहाबुद्दीन के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए लिखते हैं कि ” उनके विकास कार्यों को सिवान की जनता कभी भूल नहीं सकती”।

एमपी फंड खर्च करने मे वर्ष 2002 मे मोहम्मद शहाबुद्दीन को देश मे दुसरा और वर्ष 2003 मे पहला स्थान प्राप्त हुआ था।
मोहम्मद शहाबुद्दीन की विशेष रुचि शिक्षा व स्वास्थ के क्षेत्र मे रही है।

मोहम्मद शहाबुद्दीन के विकास कार्यों पड़ एक नजर―

  • इंडोर स्टेडियम 1 करोड़
  • राजेन्द्र स्टेडियम 5 करोड़
  • डीएवी काॅलेज भवन 2 करोड़
  • विद्या काॅलेज भवन 50 लाख
  • इंजीनियरिंग काॅलेज 1 करोड़
  • टाउन थाना 65 लाख
  • आयुर्वेदिक काॅलेज 30 लाख
  • सदर अस्पताल भवन 70 लाख
  • श्रीनगर पुल 60 लाख

अगर आप तारीख़ उठा के देखें तो मोहम्मद शहाबुद्दीन के इसी विकास कार्यों की वजह से उनके विरोधियों की तादाद बढती गई। और एक साजिश के तहत विरोधियों ने मोहम्मद शहाबुद्दीन पड़ झुठे मामलों की बौछार लगा दी
ताकि जनता मोहम्मद शहाबुद्दीन के विकास कार्यों को भूल जाए और विरोधियों ने मोहम्मद शहाबुद्दीन की बनावटी अपराधी छवि को जनता के दिमाग मे जबरदस्ती डालने की कोशिश की। मगर जबसे मोहम्मद शहाबुद्दीन जेल गए तबसे आजतक सिवान की जनता खून के आंसू रो रही है क्योकि मोहम्मद शहाबुद्दीन के जेल जाने के बाद सिवान मे विकास कार्य ठप हो गया।

नोट : ये लेखक के अपने विचार हैं

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